शायद ही कोई समझ पाया गंभीर की ये ‘चाल’, आप इसे इत्तेफाक कहेंगे या कुछ और..

शायद ही कोई समझ पाया गंभीर की ये 'चाल', आप इसे इत्तेफाक कहेंगे या कुछ और..शायद ही कोई समझ पाया गंभीर की ये ‘चाल’, आप इसे इत्तेफाक कहेंगे या कुछ और..

[स्पेशल डेस्क], नई दिल्ली। क्रिकेट में कई तरह के इत्तेफाक देखने को मिलते हैं। कुछ रिकॉर्ड बनकर सुर्खियां बन जाते हैं तो कुछ आंकड़ों की फेहरिस्त में कहीं गुम हो जाते हैं। ऐसे ही होते हैं कुछ फैसले जो क्रिकेट के मैदान पर छोटे वार से बड़ा घाव करने की क्षमता रखते हैं। आइपीएल में भी आए दिन हमने आपको कई तरह के दिलचस्प फैसलों, आंकड़ों व इत्तेफाक से रूबरू कराया और अब कल रात भी कुछ ऐसा ही दिलचस्प इत्तेफाक नजर आया।

– गंभीर का वो फैसला

कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान गौतम गंभीर और टीम मैनेजमेंट ने कल रात हैदराबाद के खिलाफ आइपीएल-10 के अहम एलिमिनेटर मुकाबले में टीम के अंदर कई बदलाव किए। उन्होंने सूर्यकुमार यादव, नाथन कूल्टर-नाइल, पीयूष चावला और इशांक जग्गी को इस अहम मैच में एंट्री दी। इन चार नामों में पीयूष चावला का नाम एक ‘मास्टर स्ट्रोक’ साबित हुआ। एक ऐसा फैसला जिसने कल रात हैदराबाद के ऊपर सबसे करारा वार किया। हैदराबाद की टीम इस मैच में 20 ओवर में 128 रन ही बना सकी। बाद में बारिश से मैच रुका रहा और देरी के कारण कोलकाता को डीएल नियम के मुताबिक 6 ओवर में 48 रन बनाने का लक्ष्य मिला और वे 7 विकेट से जीत गए।

– चावला की वो एक गेंद.. 

पीयूष चावला ने इस मैच में कोई करिश्माई प्रदर्शन नहीं किया। उन्होंने 3 ओवर में 27 रन देकर 1 विकेट लिया लेकिन उस एक गेंद पर  उनका ये एक विकेट काफी अहम था। ये विकेट था हैदराबाद के कप्तान, उनके ओपनर व इस सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले डेविड वॉर्नर का। ये पहलु सिर्फ इसलिए खास नहीं है कि ये विकेट वॉर्नर का था बल्कि असली बात इससे भी ज्यादा दिलचस्प है।

– …..और ये है दिलचस्प इत्तेफाक

पीयूष चावला ने इस टूर्नामेंट में अब तक कुल पांच मैच खेले हैं और उन पांच मैचों में वो एक मैच में खाली हाथ रहे और बाकी बचे सभी मैचों में उन्होंने एक-एक विकेट हासिल किया। दिलचस्प बात ये है कि ये सभी विकेट विरोधी टीम के ओपनर के थे। इस बात से कोई अछूता नहीं है कि क्रिकेट का कोई भी फॉर्मेट हो, खासतौर पर टी20 जिसमें शुरूआत सबसे अहम रहती है। शीर्ष पर विरोधी टीम के सबसे घातक बल्लेबाज रहते हैं और उनको अगर आउट किया तो आप उन पर सबसे करारा वार करने में सफल रहते हैं। पिचों को देखते हुए पीयूष चावला को खिलाना कप्तान की इस ओर एक सोची समझी रणनीति थी या ये सब बस इत्तेफाक था, पता नहीं.. लेकिन चावला जिन पांचों में खेले, उनमें से किसी में भी कोलकाता की टीम हारी नहीं। ये हैं उनके वो आंकड़े

पहला मैच- गुजरात के खिलाफ- 1/33 (ओपनर जेसन रॉय का विकेट लिया, कैच आउट)

दूसरा मैच- पंजाब के खिलाफ- 1/36 (ओपनर मनन वोहरा का विकेट लिया, बोल्ड)

तीसरा मैच- पुणे के खिलाफ- 1/36 (ओपनर राहुल त्रिपाठी का विकेट लिया, बोल्ड)

चौथा मैच- बैंगलोर के खिलाफ- सिर्फ दो ओवर मिले, कोई विकेट नहीं

पांचवां मैच- हैदराबाद के खिलाफ- 1/27 (ओपनर डेविड वॉर्नर का विकेट लिया, बोल्ड)

———————-

– शिवम् अवस्थी

क्रिकेट की अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें

खेल जगत की अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें

Tags:
author

Author: 

Leave a Reply