शर्मनाक: महिला पैरा तैराक को बर्लिन में मांगना पड़ा उधार

शर्मनाक: महिला पैरा तैराक को बर्लिन में मांगना पड़ा उधार

नई दिल्ली, प्रेट्र : केंद्र और राज्य सरकारें सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए भारी-भरकम धन राशि देने की घोषणा करती रहती हैं, लेकिन अफसोस इस बात का है कि अधिकारियों की गलती के कारण ये राशि उन तक नहीं पहुंच पाती और उन्हें मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। ऐसी ही शर्मनाक घटना तब सामने आई जब एक पैरा तैराक कंचनमाला पांडे को बर्लिन में लोगों से आर्थिक मदद मांगने के लिए मजबूर होना पड़ा।

पूरी तरह से दृष्टिहीन कंचनमाला सहित छह खिलाड़ियों को भारत की ओर से तीन से नौ जुलाई तक हुई बर्लिन पैरा स्विमिंग चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए भेजा गया था, लेकिन उन्हें इस यात्रा पर सरकार और भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआइ) की गलतियों का खामियाजा भुगतना पड़ा। सरकार द्वारा दी गई सहायता राशि उन तक नहीं पहुंची। पैसा न होने के कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। एक वक्त तो ऐसा आ गया कि कंचनमाला के पास खाने तक के पैसे नहीं बचे और उन्हें इसके लिए लोगों से उधार तक लेना पड़ा। इसके बावजूद कंचनमाला और सुयश जाधव ने रजत पदक जीता और वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया।

पीसीआइ के उपाध्यक्ष गुरशरण सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा स्वीकृत धनराशि को निकालने के लिए हमें जस्टिस कैलाश गौतम की अनुमति की जरूरत होती है, जिन्हें दिल्ली हाईकोर्ट ने समिति का चेयरमैन नियुक्त किया है। इसलिए हमने एथलीटों से कहा कि वे चैंपियनशिप में भाग नहीं लें या फिर खुद अपने खर्चे पर जाएं और बाद में यह राशि ले लें। टीम खुद ही अपने खर्चे पर गई थी और अब मैं यह घटना सुन रहा हूं।

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Pradeep Sehgal 

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