एक जुलाई को माथापच्ची करेगी बीसीसीआइ की विशेष समिति

एक जुलाई को माथापच्ची करेगी बीसीसीआइ की विशेष समितिएक जुलाई को माथापच्ची करेगी बीसीसीआइ की विशेष समिति

नई दिल्ली, अभिषेक त्रिपाठी। लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में अहम पहलुओं को चिह्न्ति करने के उद्देश्य से गठित बीसीसीआइ की सात सदस्यीय विशेष समिति एक जुलाई को दिल्ली में पहली बैठक करेगी। आइपीएल अध्यक्ष राजीव शुक्ला की अध्यक्षता वाली इस समिति में पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली, बीसीसीआइ के कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी, कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी, टीसी मैथ्यू, नव भट्टाचार्य और जय शाह भी शामिल हैं।

बोर्ड की सोमवार को हुई विशेष आम सभा (एसजीएम)में इस समिति के गठन का निर्णय लिया गया था। सुप्रीम कोर्ट में लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर सुनवाई की अगली तारीख 14 जुलाई है और इस समिति को 10 तारीख तक अपनी सिफारिश बीसीसीआइ को सौंपनी है, जिससे सुप्रीम कोर्ट को यह बताया जा सके कि बोर्ड उसके इस साल जनवरी में आए फैसले में कहां तक आगे बढ़ा है और क्या करने जा रहा है।

समिति के एक सदस्य ने कहा कि एसजीएम में ही अधिकतर लोग इस लोढ़ा समिति की अधिकतर सिफारिशों को मानने को तैयार थे, लेकिन पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन और उनके कुछ सहयोगियों ने बात बिगाड़ दी। हम जल्द ही बैठक करके इस पर विचार करेंगे कि क्या-क्या सिफारिशें हम आसानी से बोर्ड व राज्य संघों पर लागू हो सकता हैं। एक जुलाई को बैठक करने के बाद उसकी चर्चा से बोर्ड के कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना को अवगत कराया जाएगा। जरूरत पड़ी तो फिर बैठक की जाएगी। हम समयबद्ध रहते इसकी रिपोर्ट कार्यवाहक अध्यक्ष को सौंपने की कोशिश करेंगे।

समिति के सदस्य ने कहा कि लोढ़ा समिति के सुधारवादी कदमों को लागू करने में एक राज्य एक वोट, कैग से ऑडिट और राष्ट्रीय चयन समिति में सदस्यों की संख्या तीन से पांच करना ही मुख्य अड़ंगा हैं। एसजीएम से पहले अधिकतर सदस्य इन तीनों को छोड़कर बीसीसीआइ सुधार की लोढ़ा समिति की सभी सिफारिशों को लागू करने में लगभग सहमत भी हो गए, लेकिन अंत में कुछ लोगों ने पंगा कर दिया। जो बीसीसीआइ से बाहर हो चुके हैं वह इस प्रक्रिया को बाधित करना चाहते हैं।

वे चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट बीसीसीआइ के खिलाफ सख्त रवैया अपनाए, जबकि बोर्ड के अधिकतर सदस्य इस पक्ष में हैं कि अगली सुनवाई से पहले ही अधिकतर सिफारिशों को लागू कर दिया जाए। बाकी तीन-चार सिफारिशों पर पुनर्विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से निवेदन किया जाए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति भी इससे सहमत हो जाएगी। अब हम इसी कोशिश में लगे हैं।

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Pradeep Sehgal 

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