आर्थिक नाकेबंदी से बिगड़े नेपाल के हालात, 6,000 रुपये हुई गैस सिलेंडर की कीमत

काठमांडू: नेपाल में आर्थिक नाकेबंदी की वजह से वहां के लोग गंभीर संकट में हैं. हालात ये हैं कि कालाबाजारी की वजह से एक गैस सिलेंडर के लिए लोगों को छह हजार से भी ज्यादा रुपये देने पड़ रहे हैं.

 

काठमांडू की सड़क पर 60 साल की एक बुजुर्ग महिला पिछले नौ दिनों से एलपीजी सिलेंडर हासिल करने के लिए जद्दोजहद कर रही है. ये रोज आती है, लेकिन खाली हाथ घर लौटना पड़ता है. और जब जुगाड़ से सिलेंडर मिलने की उम्मीद बंधती भी है, तो कीमत सुनकर होश उड़ जाते हैं.

 

 

भारत में बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत करीब साढ़े पांच सौ रुपये है, लेकिन काठमांडू में इसकी कीमत है साढ़े छह हजार रुपये. चौंकिए नहीं! फिर से सुनिए एक एलपीजी सिलेंडर की कीमत सवा छह हजार रुपये है . अगर इसे नेपाली रुपये में बदलें तो एक सिलेंडर की कीमत दस हजार नेपाली रुपये होगी. पहले एक एलपीजी सिलेंडर 1400 नेपाली रुपये में मिलता था.

 

 

आर्थिक नाकेबंदी की वजह से पूरे नेपाल में एलपीजी, पेट्रोल-डीजल और दवाईयों की सप्लाई रुक गई है. जिससे नेपाल में इन चीजों की भारी किल्लत हो गई है. जिनके घर पर सिलेंडर है वो अब महज शो पीस बन गया है.

 

 

सिर्फ घरों में ही नहीं बल्कि रेस्टोरेंट भी एलपीजी सिलेंडर की किल्लत से जूझ रहे हैं. हालात ये हैं कि रेस्टोरेंट मालिक दस हजार नेपाली रुपये में सिलेंडर खरीदने को मजबूर हैं . नेपाल में पहले एक लीटर पेट्रोल 100 नेपाली रुपये में मिलता था, जो अब चार गुनी कीमत यानी 400 नेपाली रुपये में मिल रहा है.  यही हालात दवाईयों को लेकर भी है . काठमांडू में रहने वाले गोविंद को गले की बीमारी है, लेकिन दवा मिलना मुश्किल हो रहा है. नेपाल में लागू नए संविधान से मधेषी समुदाय नाखुश है.

 

भारत की सीमा से सटे नेपाल के इलाकों को मधेष कहा जाता है.  दरअसल मधेषी समुदाय के लोग नए संविधान में राजनीतिक भागीदारी कम किए जाने को लेकर विरोध कर रहे हैं. मधेष आंदोलन की वजह से अब तक 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

 

इसी आंदोलन की वजह से जरूरी चीजों की सप्लाई रुकी हुई है .नेपाल सरकार ने आर्थिक नाकेबंदी के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया है. नेपाल सरकार के आरोपों पर भारत सरकार के सूत्रों ने कहा है कि ये नेपाल का अंदरूनी मामला है. इससे भारत का कोई लेना देना नहीं है.

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