आखिर ये फैसला क्यों नहीं कर पा रहे विराट, इस मामले में धाकड़ थे कप्तान धौनी

आखिर ये फैसला क्यों नहीं कर पा रहे विराट, इस मामले में धाकड़ थे कप्तान धौनीआखिर ये फैसला क्यों नहीं कर पा रहे विराट, इस मामले में धाकड़ थे कप्तान धौनी

नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]। भारत और वेस्टइंडीज के बीच तीसरा वनडे मुकाबला शुक्रवार को खेला जाना है। रविवार को खेले गए दूसरे मुकाबले में भारत ने 105 रनों से शानदार जीत दर्ज की लेकिन इस जीत में एक बार फिर टीम की बड़ी कमजोरी सामने निकलकर आई है। सवाल ये है कि क्या इस गलती को सुधारने के लिए कप्तान विराट तीसरे वनडे में वो फैसला उठाएंगे जिससे भारतीय क्रिकेट के भविष्य की उम्मीदें जुड़ी हैं। विराट हमेशा धौनी से सीखते आए हैं और अब इस मामले में भी उन्हें पूर्व कप्तान से कुछ सीखने की जरूरत है।

– क्या वो फैसला लेंगे विराट?

यहां हम बात कर रहे हैं वेस्टइंडीज दौरे में बेंच पर बैठे दो खिलाड़ियों की- रिषभ पंत और दिनेश कार्तिक। सीरीज के दो मुकाबले हो चुके हैं और अब फैंस भी चाह रहे होंगे कि उन्हें कुछ अलग देखने को मिले। सामने एक कमजोर टीम है। भारत 1-0 से आगे है और हर तरह से विरोधी टीम से बेहद मजबूत है। ऐसे में प्रयोग करने का इससे अच्छा मौका शायद ही किसी और देश में खेलते हुए मिले। अब सवाल ये है कि आखिर विराट किनकी जगह इन खिलाड़ियों को मौका दें।

– पहले टीम, बाद में स्टार्स

इसमें कोई शक नहीं है कि सालों से युवराज सिंह और महेंद्र सिंह धौनी भारतीय मिडिल ऑर्डर की सबसे मजबूत कड़ी रहे हैं। धौनी की बात करें तो उनकी शानदार विकेटकीपिंग भी टीम के लिए बेहद जरूरी है लेकिन इसका एक पहलु ये भी है कि ये दोनों ही बल्लेबाजी में न तो चैंपियंस ट्रॉफी में चले और न ही वेस्टइंडीज के खिलाफ पिछले दो मुकाबलों में कुछ कमाल दिखा पाए (खासतौर पर युवराज)। पहले वनडे में युवी 4 रन बनाकर आउट हुए जबकि दूसरे मुकाबले में वो 14 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। वहीं, धौनी पहले वनडे में नौ गेंदों पर नौ रन बनाकर नाबाद रहे जबकि दूसरे वनडे में अंतिम ओवरों में भी 13 गेंदों पर नाबाद 13 रन ही बना सके। वहीं चैंपियंस ट्रॉफी की बात करें तो इंग्लैंड में हुए उस टूर्नामेंट में माही ने पांच मैचों की दो पारियों में कुल 67 रन बनाए थे जबकि युवराज ने पांच मैचों की चार पारियों में कुल 105 रन ही बनाए। दोनों ने कई विश्व स्तरीय साझेदारियों को अंजाम दिया है लेकिन फिलहाल शायद इन दोनों को थोड़ा आराम की जरूरत है। सवाल यही है कि क्या इन दोनों दिग्गजों या फिर इनमें से किसी एक को भी बाहर करने का फैसला कोहली ले पाएंगे।

– क्या भूल गए धौनी का धाकड़ अंदाज

धौनी अपने कप्तानी के दिनों में इसी चीज के लिए मशहूर थे कि उन्होंने कभी किसी खिलाड़ी का स्टार स्टेटस या फिर सिर्फ उनके अनुभव के लिए उसको टीम में बरकरार नहीं रखा। माही हालातों के हिसाब से टीम की जरूरत और खिलाड़ियों के फॉर्म को देखते हुए फैसला लेते थे। इस दौरान कोई दोस्त नाराज हो या कोई दिग्गज, इसकी उन्होंने कभी कोई फिक्र नहीं की। अगर 2008 के ऑस्ट्रेलिया दौरे को याद करें तो उस दौरान सबसे बड़ा चर्चा का विषय बना था धौनी का धाकड़ फैसला। फैसला राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण को टीम से बाहर करने का। धौनी को लगा कि वे तीन खिलाड़ी टीम में फिट नहीं बैठते हैं और उन्होंने चयनकर्ताओं को अपनी मर्जी साफ-साफ बता दी। इसके अलावा वीरेंद्र सहवाग का टीम से बाहर होना भी धौनी की कप्तानी के समय विवाद बना था। तब से लेकर कप्तानी से इस्तीफा देने तक धौनी के फैसले हमेशा से ही चर्चा का विषय रहे लेकिन एक हकीकत ये भी रही कि माही ने उस समय जो फैसले लिए, उसी के दम पर आगे हमने वनडे विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी जैसे बड़े खिताब जीते।

– तीन-तीन विकेटकीपर

इस समय वेस्टइंडीज में मौजूद 15 सदस्यीय भारतीय टीम में एक या दो नहीं बल्कि तीन विकेटकीपर बल्लेबाज मौजूद हैं। धौनी के अलावा रिषभ पंत और दिनेश कार्तिक भी विकेटकीपर हैं। अगर धौनी को आराम दिया गया तो रिषभ कीपिंग की जिम्मेदारी उठा सकते हैं वहीं, युवी को आराम दिया तो कार्तिक फील्डिंग में उतना ही चुस्त हैं जितना कि युवराज। वैसे विराट ने प्रेस से बात करते हुए ये संकेत दिए हैं कि तीसरे वनडे में बाहर बैठे कुछ खिलाड़ियों को मौका मिल सकता है और रिषभ का नाम उसमें सबसे ऊपर आना तय है। रिषभ की उम्र अभी 19 वर्ष है और वो जहां-जहां खेल रहे हैं अच्छा प्रदर्शन करने में सफल रहे हैं।

– द्रविड़ की भी यही राय

वैसे ये सिर्फ हमारी सोच नहीं है बल्कि कई अन्य दिग्गजों का भी यही मानना है कि अब जब टीम में कोई कोच मौजूद नहीं है तो कप्तान विराट के अधिकार भी बढ़ चुके हैं, ऐसे में उन्हें कड़े फैसले लेकर अपनी मजबूती दिखानी चाहिए। पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ ने भी भारतीय मिडिल ऑर्डर में धौनी और युवराज की मौजूदगी पर सवाल उठाए हैं। द्रविड़ का कहना है कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य को देखते हुए कड़े फैसले लेने का ये सही समय है और चयनकर्ताओं व टीम मैनेजमेंट को भी इसके बारे में सोचना चाहिए। द्रविड़ ने साफ शब्दों में कहा कि अब ये देखा जाना जरूरी है कि इन दोनों खिलाड़ियों (धौनी और युवी) की टीम में जगह बनती भी है या नहीं, ये भविष्य की रणनीति के हिसाब से टीम में फिट बैठ रहे हैं या नहीं और इन दोनों को बाहर बिठाना होगा या किसी एक को बाहर रखकर काम चल जाएगा। खैर, देखना दिलचस्प होगा कि विराट आने वाले दिनों पर द्रविड़ की बातें, धौनी के इतिहास और दो धुरंधरों के फॉर्म पर कितना गौर फरमाते हैं।

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Shivam Awasthi 

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