5 शानदार क्रिकेटर, 4 भारतीय कप्तान, आ गए शुभकामनाओं वाले वो 5 दिन

5 शानदार क्रिकेटर, 4 भारतीय कप्तान, आ गए शुभकामनाओं वाले वो 5 दिन5 शानदार क्रिकेटर, 4 भारतीय कप्तान, आ गए शुभकामनाओं वाले वो 5 दिन

नई दिल्ल, [स्पेशल डेस्क]। एक बार फिर आपका स्वागत है साल के उस हफ्ते में जो भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद खास है। जुलाई महीने में 3 जुलाई से लेकर 10 जुलाई के बीच ऐसे पांच दिन मौजूद हैं जब बधाइयों की ऐसी बौछार होती है कि साल भर ऐसा देखने को नहीं मिलता। इन 8 दिनों के अंदर पांच भारतीय क्रिकेटरों का जन्मदिन आता है और इनमें से चार क्रिकेटर भारतीय टीम के कप्तान बने।

– 3 जुलाई

इसकी शुरुआत आज यानी 3 जुलाई से होती है। आज के दिन 1980 में जन्म हुआ था उस क्रिकेटर का जो अनिल कुंबले (956 विकेट) के बाद सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय विकेट लेने के मामले में दूसरा भारतीय है। ये हैं स्पिनर हरभजन सिंह जो भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल गेंदबाजों में से हैं। टर्बनेटर के नाम से मशहूर इस स्पिनर ने अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर (वनडे, टेस्ट, टी20) में कुल 711 विकेट लिए हैं। वो विश्व क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने के मामले में 12वें पायदान पर हैं। 

– 4 जुलाई

4 जुलाई 1922 को जन्म हुआ था पूर्व कप्तान व भारतीय क्रिकेट के सबसे शानदार स्पिनरों में से एक गुलाम अहमद का। तकरीबन एक दशक के अपने करियर में गुलाम अहमद ने वीनू मांकड़ और सुभाष गुप्ते के साथ स्पिनरों की ऐसी तिकड़ी खड़ी की जिससे दुनिया का हर बल्लेबाज खौफ खाने लगा था। उनकी खासियत ये थी कि वो उन पिचों पर भी शानदार गेंदबाजी करते थे जो स्पिनरों के पक्ष में नहीं होती थीं। गुलाम अहमद को 1955 में भारतीय टीम का कप्तान बनाया गया और उन्होंने ये जिम्मेदारी तीन मैचों में निभाई। भारत-पाकिस्तान के बीच पहली बार हुए अंतरराष्ट्रीय मैच (1952 टेस्ट मैच) में अहमद ही स्टार बने थे। उन्होंने उस मैच में न सिर्फ पांच विकेट लिए बल्कि 11वें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए अर्धशतक भी जड़ा। गुलाम अहमद ने 22 टेस्ट मैचों में 68 विकेट लिए थे। 28 अक्टूबर 1998 में 76 की उम्र में उनका निधन हो गया था।

– 7 जुलाई

1981 में आज ही के दिन रांची में उस खिलाड़ी का जन्म हुआ था जिनके बारे में कुछ शब्दों में बताया नहीं जा सकता। वो भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल कप्तानों में से एक रहे और आजकल टीम इंडिया में कप्तान न होने के बावजूद युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं। जी हां, नाम है महेंद्र सिंह धौनी। 2004 में न जाने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कहां से अचानक एक लंबे बालों वाला धुरंधर आया और तेजी से क्रिकेट जगत में छा गया। सबसे पहले 2007 में अपनी कप्तानी में पहला टी20 विश्व कप दिलाया, फिर 2011 में भारत को उसका दूसरा विश्व कप हासिल कराया, भारतीय टीम को नंबर.1 टेस्ट टीम बनाया और 2013 में आइसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब भी दिलाया। अब वो 36 वर्ष के होने जा रहे हैं लेकिन उनका प्रभाव आज भी वैसा ही है जैसा कि पहले देखने को मिलता था।

– 8 जुलाई

धौनी से पहले जिस कप्तान ने भारतीय टीम की तस्वीर बदली थी, जिसने टीम इंडिया को विदेश में जीतना सिखाया और जुझारू खिलाड़ियों की एक फौज खड़ी की उसका जन्म 8 जुलाई 1972 को कोलकाता में हुआ था। महान कप्तान सौरव गांगुली। 1992 से 2008 तक क्रिकेट जगत में जलवा बिखेरने वाले इस बाएं हाथ के प्रभावी बल्लेबाज ने 113 टेस्ट मैचों में 7212 रन जबकि 311 वनडे मैचों में 11,363 रन बनाए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 38 शतक भी जड़े। भारत ने गांगुली की कप्तानी में 49 टेस्ट में 21 मैच जीते, 13 गंवाए और 15 मैच ड्रॉ रहे। वहीं, वनडे क्रिकेट में उनकी अगुआइ में भारत ने 146 मैच खेले जिसमें 76 में जीत मिली, 65 में हार और 5 मैचों का कोई नतीजा नहीं निकला।

– 10 जुलाई

10 जुलाई 1949 को मुंबई में उस भारतीय खिलाड़ी का जन्म हुआ था जिसने न सिर्फ भारतीय क्रिकेट में बल्लेबाजी को नए आयाम तक पहुंचाया बल्कि कुछ ऐसे रिकॉर्ड बनाए जो आज भी यादगार हैं। हम बात कर रहे हैं पूर्व दिग्गज बल्लेबाज व कप्तान सुनील गावस्कर की। विश्व टेस्ट क्रिकेट में पहली बार जो खिलाड़ी 10 हजार रन का आंकड़ा पार करने में सफल रहा वो गावस्कर ही थे। सचिन द्वारा 2005 में रिकॉर्ड तोड़ने से पहले तक वो सर्वाधिक 34 टेस्ट शतक जड़ने वाले खिलाड़ी भी थे। अपनी पहली ही टेस्ट सीरीज में सर्वाधिक रन (774) बनाने का रिकॉर्ड आज भी उन्हीं के नाम दर्ज है। ऐसे न जाने कितने दिलचस्प रिकॉर्ड गावस्कर ने अपने नाम किए। सिर्फ टोपी लगाकर खतरनाक तेज गेंदबाजों का सामना करने वाले इस निडर बल्लेबाज ने 125 टेस्ट मैचों में 10,122 रन बनाए जबकि 108 वनडे मुकाबलों में 3092 रन बनाए। वो 1983 की विश्व कप विजेता भारतीय टीम का हिस्सा रहे। उन्होंने 1970 से 1980 के बीच कई मैचों में भारत की कप्तानी की। उनकी अगुआइ में भारत ने नौ मैच जीते, आठ गंवाए जबकि 30 मैच ड्रॉ रहे।

 

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Shivam Awasthi 

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