सज गई है सिनेमा की महफिल….जागरण फिल्म फेस्टिवल आज से

सज गई है सिनेमा की महफिल....जागरण फिल्म फेस्टिवल आज सेसज गई है सिनेमा की महफिल….जागरण फिल्म फेस्टिवल आज से

मुंबई। आज 1 जुलाई से जागरण फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत दिल्ली में हो रही है। इस दौरान फिल्मों से जुड़े बड़े सितारे इस फेस्ट में शिरकत करेंगे और सिनेमा के बारे में चर्चा भी करेंगे।

फेस्ट की उद्घाटन फिल्म ‘दी फकीर ऑफ वेनिस’ ( 2017, निर्देशक-आनंद सुरापुर) है। फिल्म की कहानी लीक से हट कर है। एक भारतीय को एक ऐसे फकीर को खोजने के लिए नियुक्त किया जाता है जो वेनिस में एक “इंस्टॉलेशन आर्ट” प्रोजेक्ट के लिए खुद को मिट्टी में दफन कर दे। वह मुम्बई में एक गरीब, चाल निवासी से मिलता है, और उसे यूरोपीयन कला का लालच देकर काम करने के लिए मना लेता है। फिर यहां से शुरू होती है अनोखी कथा की शुरुआत जो बाद में एक अजीब रिश्ते की कहानी बन जाती है।

दो चरित्रों के बीच की कहानी जो एक दूसरे को ठगने के लिए साथ आए हैं और इस काम में दोनों एक दूसरे की ठगी को किस तरह समझते हैं और फिर कैसे एक दूसरे के धोखे का पर्दाफाश करते हुए अंजाम तक पहुंचते हैं, इसकी दिलचस्प किस्सागोई है, रोचक फिल्मांकन है। फिल्म के निर्माता निर्देशक पुनीत देसाई और आनंद सुरपुर दोनों बहुत खुश और उत्साहित हैं कि उनकी फिल्म जागरण फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जा रही है। प्रोड्यूसर पुनीत देसाई अपनी खुशी जताते हैं, ”हमें इस उत्सव में दर्शकों के सामने अपनी फिल्म दिखाते हुए बहुत ही रोमांच महसूस हो रहा है क्योंकि हमने इस क्षण का बहुत ही लम्बे समय से इंतज़ार किया है।”

यह भी पढ़ें: जंपिंग स्टार जीतेंद्र अब क्यों नहीं आते फिल्मों में नज़र, बता रही हैं बेटी एकता कपूर

आपको बता दें कि, आज दोतरफा रोमांच है, जितना निर्माता-निर्देशक के लिए, उतना ही अच्छे सिनेमा के प्रेमियों के लिए भी। गहरे आत्मविश्वास से भरे निर्देशक आनंद सुरपुर भी अपनी फिल्म को लेकर बेहद आश्वस्त हैं। आज जब उनकी फिल्म पहली बार परदे पर दिखाई जाने वाली है, आनंद उत्साहित होकर बताते हैं, ”मुझे उम्मीद है कि इस फिल्म को जो कोई भी देखेगा वह खुद को इन सभी चरित्रों के साथ जोड़ेगा और फिल्म के अंत में उसे मनोरंजन भी महसूस होगा।”

यह भी पढ़ें: ये हैं बॉलीवुड के डांसिंग किंग, ये नाचें तो आप भी अपने पैर रोक नहीं पाएंगे

जब फिल्में किसी विचार को लेकर बनें तो प्रभाव चौगुना पड़ता है। शब्द भावना के स्तर पर दर्शको को जोड़ते हैं तो विचार दिमागी स्तर पर। इन दोनों की वजह से अलग किस्म का आवेग पैदा होता है। फ्रांस में जो काम गोदार जैसे फिल्मकार ने किया, बाद में भारत सहित दुनिया भर में कई फिल्मकारों ने किया जो वैचारिक स्तर पर फिल्मों को ले जाना चाहते थे। ऐसी आवेग से भरी मोरक्को की एक फिल्म ‘आदियोस कारमेन’ ( 2013) आज दिखाई जा रही है जिसमें आपसी संबंधों को लेकर नए किस्म के वैचारिक पहलू सामने आते हैं।

यह भी पढ़ें: अपने होमटाउन से कनेक्शन बनाने के लिए श्रीदेवी करती हैं ये काम

परदे पर उस आवेग को महसूस किया जा सकता है जो अक्सर भारतीय फिल्मकार कुमार शहानी की फिल्मों में महसूस की जाती है। जिस तरह वे विचार और भावना को अलग करके नहीं देखते थे, उसी तरह इस फिल्म के निर्देशक मोहम्मद अमीन भी सोचते, बरतते दिखाई देते हैं। मोहम्मद एक इंटरव्यू में हिंदी सिनेमा के प्रभाव को एक हद तक स्वीकारते भी हैं। बस वे एक फर्क रखते हैं कि हिंदी सिनेमा की तरह समाधान नहीं तलाशते। वे यथार्थ को स्वप्न में नहीं बदलते, यथावत रहने देते हैं। निर्देशक मोहम्मद अपने इंटरव्यू में खुल कर बताते हैं, ”जिस व्यक्ति पर मैंने कारमेन आधारित की थी उसने बॉलीवुड के माध्यम से मुझे कुछ भावनाओं को परखने दिया और मुझे मेरा ही इतिहास समझने में मदद की।

यह भी पढ़ें: …तो ये होंगे जग्गा जासूस के असली जासूस

समारोह में इस बार मोरक्को सिनेमा पर विशेष फोकस है। अरबी, स्पेनिश और फ्रेंच भाषा से लैस फिल्म ‘आडियोस कारमेन’ सन 1975 की पृष्ठभूमि पर दस वर्षीय लड़के अमर और एक स्पेनिश रिफ्यूजी कारमेन के बीच परिस्थितिवश पनपे संबंधों की कहानी है। इस फिल्म को अब तक कई उल्लेखनीय राष्ट्रीय, अंतराष्ट्रीय सम्मान, पुरस्कार मिल चुके हैं। आज दिखाई जाने वाली कुछ उल्लेखनीय फिल्मों का जिक्र लाजिमी है। चांदनी, बॉबी, टोपे (बांग्ला, निर्देशक-बुद्धदेव दास गुप्ता), प्वाइंट ऑफ विउ ( निर्देशक-ओत्वीन कार्ल), दी रेज (निर्देशक-माइकल) और चरणदास चोर। क्या संयोग है कि इधर समारोह में बुद्धदेव दास गुप्ता की बहुचर्चित फिल्म दिखाई जा रही है

यह भी पढ़ें: संजय दत्त की ज़िंदगी को मक्खन लगा कर परोसने की कोशिश नहीं-रणबीर

उधर आज एक खुशखबर आई है कि उन्हें ऑस्कर पुरस्कार में वोटिंग करने वाले सदस्य के रुप में चुना गया है। बुद्धदेव बांग्ला सिनेमा के दिग्गज हैं जिन्होंने समानांतर सिनेमा के आंदोलन को आज भी जिंदा रखा है और अपनी शर्त्तो पर फिल्म बना रहे हैं। ‘टोपे’ फिल्म आला दर्जे के सिनेप्रेमियों के लिए है जिन्हें चुनिंदा फिल्में देखना पसंद हैं। जो सिनेमा को कला के रुप में देखते समझते हैं। यह फिल्म बड़े परदे को कैनवास में बदल देती है। घूमता हुआ कैनवास पर जिस कोई चित्रकथा कही जा रही है।

यह भी पढ़ें: परमाणु परीक्षण से अंतरिक्ष की सैर तक, रोमांच के नए सफ़र पर बॉलीवुड

एक और फिल्म ‘चरणदास चोर’ दिखाई जा रही है। इसके नाम को लेकर भ्रम हो सकता है। क्योंकि इस नाम से रंगकर्मी हबीब तनवीर का बेहद लोकप्रिय नाटक भी है और नाटक से पहले वर्ष 1975 में श्याम बेनेगल इस पर फिल्म बना चुके। पहला चरणदास चोर, विजयदान देथा की प्रसिद्ध लोक कथा पर आधारित था, नया चरणदास ( निर्देशक- श्याम माहेश्वरी) एक ऐसे चोर की कहानी है जो भाग रहा है और उसे कुछ और मिल जाता है। इसमें चोरों की वह कहानियां हैं जिनमें हास्य, स्थितिजन्य कॉमेडी, थ्रिल, इमोशन की कई तहों के साथ फिल्म आगे बढ़ती है।

यह भी पढ़ें: दीपिका, रणबीर, कटरीना, सोनम… Geek लुक कर रहा है फिर से ट्रेंड, थैंक यू बॉलीवुड

आज दिखाई जा रही है एक और महत्वपूर्ण फिल्म ‘प्वाइंट ऑफ विउ’ ( निर्देशक-ओत्वीन कार्ल) सफलता और असफलता के साज़ की कहानी है जिसमें उत्तरी जर्मनी के ग्लैमर जगत की चमकदमक और अनसुलझे रहस्यों को सुलझाने की कहानियां गूंथी गई हैं। यह सबके यानी अलग-अलग स्वभाव के इन्सानों के पॉइंट ऑफ व्यू से समस्या को हल करने की कहानी है। फिल्मों के अलावा आज कई अन्य आकर्षण हैं जिसमें किसी भी सिनेप्रेमी की दिलचस्पी हो सकती है। अपने दिलचस्प बयानों और ट्विट से अक्सर विवादों में रहने वाले अभिनेता ऋषि कपूर से बातचीत का सेशन है। उनसे बात करेंगे प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक मयंक शेखऱ। दर्शको को भी उनसे सवाल पूछने का सुनहरा मौका मिल सकता है। अगर आपके दिल में कोई सवाल कुलबुला रहा हो, सितारे तक आपकी पहुंच न हो पा रही हो तो इस कार्यक्रम में पहुंच कर अपने चहेते सितारे से सवाल पूछ सकते हैं। सवाल पूछने और जवाब पाने का इससे बेहतर मौका और कहां।

यह भी पढ़ें: तस्वीरें: मैं भी सुपरस्टार…छोटा शाहरुख़ खान

शीघ्र रीलीज़ होने वाली फिल्म ‘मॉम’ की स्टार कास्ट यानी श्रीदेवी, अक्षय खन्ना, नवाजुद्दीन सिद्दिकी से मिलने का मिलने का अवसर भी मिलेगा।

By
Rahul soni 

Tags:
author

Author: