शरणार्थियों की मदद की अपील

राहत एजेंसियों का कहना है कि संघर्ष के कारण लगभग बीस लाख लोग विस्थापित हैं

पाकिस्तान के स्वात क्षेत्र में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई के कारण लाखों लोग अपने घर छोड़कर वहाँ से भाग गए थे और
अब पाकिस्तान के शहरों में शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र बालकोष यानि यूनिसेफ़ के विश्व में आपात स्थिति विभाग के अध्यक्ष लुई जॉर्जिस आर्सेनॉल्ट ने बीबीसी संवाददाता जिल मैक्गिवरिंग को इस्लामाबाद में बताया कि स्कूलों में बनाए गए शरणार्थी शिविर में क्षमता से ज़्यादा लोग हैं.

उनका कहना था कि इससे स्थानीय लोगों और प्रशासन के लिए ख़ासी मुश्किलें पैदा हो गई हैं.

सरकार ने लौटने को कहा

 ये लोग इस बार खेती के लिए वापस नहीं जा पा रहे हैं. यदि ऐसा होता है तो वे इस बार की फ़सल खो देंगे और यह एक ग़ौरतलब बात है.
हालाँकि लोगों पर ख़ासा दबाव है कि वे वापस जाएँ क्योंकि शरणार्थी शिविरों की हालत ख़राब है और बारिश को मौसम भी आ रहा है. साथ
ही यही फ़सल बीजने का मौसम है

यूनिसेफ़ के लुई जॉर्जिस आर्सेनॉल्ट का कहना था, “ये लोग इस बार खेती के लिए वापस नहीं जा पा रहे हैं. यदि ऐसा होता है तो वे इस
बार की फ़सल खो देंगे और यह एक ग़ौरतलब बात है. हालाँकि लोगों पर ख़ासा दबाव है कि वे वापस जाएँ क्योंकि शरणार्थी शिविरों की हालत
ख़राब है और बारिश को मौसम भी आ रहा है. साथ ही यही फ़सल बीजने का मौसम है.”

यूनिसेफ़ चाहता है कि पाकिस्तान की सरकार शरणार्थियों को मूलभूत सुविधाएँ – पानी, ऊर्जा, स्कूल और स्वाथ्य सेवाएँ प्रदान करे लेकिन
इसके लिए बहुत ही कम अंतरराष्ट्रीय मदद मिली है.

उधर पाकिस्तान की सरकार ने शरणार्थियों के अनुरोध किया है कि वे अपने-अपने घरों को लौट जाएँ क्योंकि अब ऐसा करने में ख़तरा नहीं
है.

हालाँकि कई शरणार्थी वापस चले गए हैं लेकिन यूनिसेफ़ चाहता है कि सरकार लोगों को लिखित तौर पर उनकी सुरक्षा की गारंटी दे.

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