चीन की सेना में कम होंगे तीन लाख सैनिक : शी जिनपिंग

बीजिंग: चीन अपनी सेना में करीब तीन लाख सैनिकों की कटौती कर सकता है. इस बात का ऐलान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एशिया में द्वीतिय विश्व युद्ध के 70 वर्ष पूरा होने पर आयोजित एक सैन्य परेड के दौरान किया. सैनिकों की कटौती का यह कदम शी द्वारा चलाए जा रहे व्यापक भ्रष्टाचार रोधी अभियान की पृष्ठभूमि में उठाया जा रहा है. शी देश के राष्ट्रपति होने के साथ-साथ सत्ताधारी कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के अध्यक्ष और सेना के प्रमुख भी हैं.

 

चीन की सेना पिपुल्स लिब्रेशन आर्मी, दुनिया की सबसे बड़ी आर्मी होने का दावा करती है. पीएलए का रक्षा बजट अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर आता है. पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का संख्याबल वर्ष 1980 में 45 लाख था. वर्ष 1985 में इसके संख्याबल में पहली बार परिवर्तन करते हुए इसे 30 लाख कर दिया गया था और इसके बाद इसे 23 लाख कर दिया गया.

 

हालांकि जानकार मानते हैं कि चीन द्वारा की जाने वाली सेना में कटौती से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा. मीडिया में छपी खबरों की मानें तो चीन ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी वायु सेना और नौसेना में जबरदस्त बदलाव करते हुए उसको काफी मजबूती प्रदान की है. इसके चलते इस बात से काई खास फर्क नहीं पड़ता है कि उसके कितने सैनिक फील्ड में मौजूद रहेंगे.

 

लिहाजा इस कटौती से उसकी ताकत में कोई कमी नहीं आएगी और न ही वह कमजोर ही होगा. चीन का रक्षा बजट करीब 141 बिलियन डालर का है जो उसके जीडीपी का करीब 1.5 फीसद है. चीन की सेना में तकरीबन 2,285,000 सैनिक हैं जबकि 510,000 सैनिक रिजर्व में रहते हैं.

 

गौरतलब है कि सेना के लगभग 40 उच्च अधिकारी सेना के अभूतपूर्व पुनर्निर्माण में भ्रष्टाचार रोधी जांच का सामना कर रहे हैं. इन अधिकारियों में केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के दो पूर्व उपाध्यक्ष शामिल हैं. वर्ष 2013 में प्रभार संभालने के बाद शी ने प्रायोगिक प्रशिक्षण पर ज्यादा जोर दिया है, जिसमें युद्ध जैसी असली परिस्थितियों में अभ्यास शामिल हैं.

 

सेना ने आधुनिक हथियार हासिल कर लिए हैं, जिनमें लंबी दूरी की मिसाइलें, आधुनिक विमान, विमान वाहक और जमीनी स्तर के हथियार शामिल हैं. सेना का यह पुनर्निम्राण ऐसे समय पर भी हो रहा है, जबकि चीन दक्षिणी चीनी सागर में समुद्री विवादों को लेकर कई पूर्वी एशियाई देशों के साथ व्यापक गतिरोध में फंसा हुआ है. इन देशों को अमेरिका का समर्थन है. इसके अलावा पूर्वी चीनी सागर में जापान के साथ भी इसका गतिरोध है.

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