घर गिरवी, सरकार मौन, मदद करेगा कौन? अब चंदे के सहारे चैंपियन

घर गिरवी, सरकार मौन, मदद करेगा कौन? अब चंदे के सहारे चैंपियनघर गिरवी, सरकार मौन, मदद करेगा कौन? अब चंदे के सहारे चैंपियन

नई दिल्ली, अभिषेक त्रिपाठी। राष्ट्रीय स्तर पर नौ स्वर्ण पदक जीतने वाले 18 साल के भारतीय फिगर स्केटर निश्चय लूथरा की ट्रेनिंग के लिए उनके माता-पिता ने अपना घर गिरवी रख दिया। 20 लाख लोन होने के कारण अब बैंक ने और रकम देने से मना कर दिया है। केंद्र सरकार ने 2015 और 2016 में नौ लाख की मदद दी और उसके बाद मौन हो गई। 

पिछले साल दिल्ली सरकार ने एक साल की ट्रेनिंग का खर्चा उठाने का वादा किया, लेकिन वह भी हवाहवाई निकला। अब यह फिगर स्केटर चंदे से मिली रकम से अमेरिका में अपनी ट्रेनिंग पूरी करके 2018 में दक्षिण कोरिया में होने वाले विंटर ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतना चाहता है।

पिछले साल निश्चय की खबर दैनिक जागरण में छपने के बाद खेल का सामान बनाने वाली एक कंपनी ने निश्चय की मां नीलम कांता से संपर्क किया। उस कंपनी की तरफ से निश्चय का एक वीडियो बनाया गया और अब भारतीय क्रिकेटर रोहित शर्मा, केएल राहुल, ऋषभ पंत और उन्मुक्त चंद उसे सोशल मीडिया पर प्रमोट कर रहे हैं। इन क्रिकेटरों ने ट्विटर पर अपनी डीपी (डिस्पले पिक्चर) हटाकर निश्चय की फोटो लगाकर लोगों से ट्रेनिंग में मदद करने की अपील की है। 

नीलम को उम्मीद है कि जो सरकार ने नहीं किया वह शायद देश की जनता करे। राजधानी के कालका जी इलाके में रहने वाली नीलम ने कहा कि केंद्रीय खेल मंत्री विजय गोयल दिल्ली के ही हैं, लेकिन कई बार उनसे मिलने के बाद भी कोई मदद नहीं मिल पाई। सर्बानंद सोनोवाल के खेल मंत्री रहते हुए 2015 और 2016 के बीच करीब नौ लाख रुपये की मदद मिली थी। जहां तक दिल्ली सरकार की बात है तो पिछले साल मई में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली के आठ खिलाड़ियों व उनके माता-पिता के साथ बैठक की थी। 

इस बैठक में वादा किया गया था कि राज्य सरकार ऐसी नीति बनाएगी जिससे दिल्ली के होनहार बच्चों की ट्रेनिंग समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके। बैठक के बाद कुछ अधिकारियों ने यह भी वादा किया कि निश्चय के एक साल की अमेरिका में ट्रेनिंग की फाइल जल्द ही स्वीकृत हो सकती है, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उनकी तरफ से दो साल में एक बार 84 हजार तो दूसरी बार 1.25 लाख रुपये की स्कॉलरशिप जरूर मिली। दिल्ली सरकार के ओएसडी (खेल, शिक्षा निदेशालय) और भारतीय पहलवान सुशील कुमार से जब इस बारे में बुधवार को पूछा गया तो उन्होंने जानकारी इकठ्ठा करके बताने की बात कही, लेकिन गुरुवार को उन्होंने फोन भी नहीं उठाया।

निश्चय की मां नीलम कांता का कहना है, ‘केंद्र और राज्य सरकार के चक्कर लगाते-लगाते मैं थक गई। अब तक हुई बच्चे की ट्रेनिंग में अपनी बचत को खर्च कर चुकी हूं। मकान गिरवी है। अब क्राउड फंडिंग का ही सहारा है। इसकी अमेरिका की ट्रेनिंग का एक साल का खर्चा 25-30 लाख रुपये है।’  

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Bharat Singh 

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