अजमेर पहुँचे पाकिस्तान से श्रद्धालु


अजमेर शरीफ़ में लोग इंसानियत और भलाई के लिए दुआ मांगते हैं

ख़्वाजा को उनके चाहने वाले ग़रीब नवाज भी कहते है. उनके सालाना उर्स पर पूरी दुनिया से श्रद्धालु आते है. इस साल उर्स 25 जून
से शुरू हो चुका है.

वैसे तो भारत-पाकिस्तान के रिश्तो में उतार-चढ़ाव आता रहता है. मगर अजमेर शरीफ़ एक ऐसा स्थान है जहाँ कोई सरहद, धर्म, बिरादरी
और इलाक़ा रूहानी इबादत के रास्ते में रूकावट नहीं खड़ी करता है.

इंसानियत के लिए दुआ

पाकिस्तान से एक विशेष रेलगाड़ी से तीन सौ से अधिक श्रद्धालुओं का एक जत्था शनिवार को अजमेर पहुँचा.

पुलिस अधिकारियों ने बीबीसी को बताया की तीन सौ से अधिक पकिस्तानी ज़ायरीन को एक सुरक्षित जगह ठहराया गया है. ये ज़ायरीन चार जुलाई
तक अजमेर में रहेंगे.

सूफ़ी संत ने शांति और अमन के लिए ऐसा काम किया की लोग यहाँ आकर इंसानियत और भलाई के लिए दुआ मांगते है.

दो साल पहले जब वहाँ विस्फोट हुआ तब भी ज़ायरीनों का आना नहीं रुका. उस घटना को देखते हुए अजमेर और इस पवित्र दरगाह की सुरक्षा
बढ़ा दी गई है.

 पाकिस्तान में लोग दोस्ती की बात करते मिले. लोग वहाँ भारत की जम्हूरि़यत और तालीम की बहुत तारीफ़ कर रहे थे

ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह दक्षिण एशिया के मुसलमानों के लिए मक्का और मदीना के बाद सबसे पवित्र स्थान मानी जाती है.

इस दरगाह पर इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक़ रजब महीने की पहली तारीख़ से उर्स शुरू होकर रजब के छठवें दिन तक चलता है.

दरगाह के एक ख़ादिम सर्वर चिश्ती कहते हैं कि पूरा माहोल रूहानी है. लोग पूरी दुनिया में शांति और इंसानी तरक्की के लिए दुआ कर
रहे है.

वह कहते हैं कि भारत-पाकिस्तान में इस तरह श्रदालुओं का आना-जाना बढ़ना चाहिए. वे हाल ही में पाकिस्तान होकर लौटे हैं.

दोस्ती की चाहत

चिश्ती कहते हैं कि वहाँ भी लोग दोस्ती की बात करते मिले. लोग वहाँ भारत की जम्हूरि़यत और तालीम की बहुत तारीफ़ कर रहे थे.

उर्स के लिए भारत में ख़ास रेल गाडि़याँ शुरू की गई हैं तो राजस्थान में भी बसों का विशेष इंतज़ाम किया गया है.

भारत की विभिन्न राजनीतिक पार्टियाँ और उनके नेताओं की ओर से दरगाह पर चादर चढ़ाई गई है.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की और से चादर चढ़ाई जा चुकी है जबकि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भी उर्स के मोक़े
पर चादर भेजी थी जिसे राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री सीपी जोशी ने चढ़ाया.

इस दरगाह पर न केवल भारत बल्कि पड़ोसी देशों के भी सियासी नेता यहाँ आकर इबादत करना नहीं भूलते हैं.

अजमेर के ज़र्रे-ज़र्रे में इस समय ज़ायरीन हैं और चारो तरफ इबादत का शमा है. ख़्वाजा के दरबार में रोज़ रूहानियत की महफ़िलें
सज रही हैं. ज़ायरीनों की भीड़ उमड़ रही है.

ख़्वाजा के दरबार में आने वालों में आम और ख़ास दोनों शामिल हैं. ख़्वाजा के दरबार में क्या राजा क्या रंक सब बराबर हैं.

Tags:
author

Author: